एनआईटी चौपाटी को हटाने के खिलाफ एजाज़ ढेबर ने दी चेतावनी, मंत्री को सौंपा ज्ञापन,
एनआईटी चौपाटी विवाद गरमाया: पूर्व महापौर ने सरकार को दी 7 दिन की चेतावनी
रायपुर। एनआईटी चौपाटी हटाने के खिलाफ विरोध अब तेज़ हो गया है। पूर्व महापौर एजाज़ ढेबर के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने शनिवार को नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव को ज्ञापन सौंपते हुए कार्रवाई को राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक लापरवाही बताया।
एजाज ढेबर ने कहा कि नगर निगम प्रशासन ने वर्षों से संचालित चौपाटी को बिना कारण दर्ज किए और बिना सुनवाई का अवसर दिए हटाने का निर्देश दिया है, जो पूरी तरह अवैधानिक, अन्यायपूर्ण और आजीविका के अधिकार का उल्लंघन है।
ज्ञापन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे:
प्रशासनिक लापरवाही का आरोप:
ज्ञापन में कहा गया कि चौपाटी का डिज़ाइन और निर्माण स्वयं नगर निगम ने मंजूर किया था। ऐसे में अब इसे अवैध कहना प्रशासन की अपनी गलती को छिपाने जैसा है।
राजनीतिक दबाव में कार्रवाई:
ढेबर के अनुसार क्षेत्रीय विधायक के दबाव में बिना प्रक्रिया और बिना जांच दुकानों को हटाने का निर्णय लिया गया है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।
दोहरे मानदंड का सवाल:
ज्ञापन में पूछा गया कि यदि स्कूलों के पास चौपाटी हटाई जा रही है तो बूढ़ापारा जैसे क्षेत्रों में कार्रवाई क्यों नहीं, जहां शिक्षण संस्थान होने के बावजूद चौपाटी चल रही हैं।
₹16 करोड़ की पाइपलाइन पर सवाल:
गुड़ियारी इलाके में बिना जल स्रोत और DPR के 16 करोड़ रुपए की पाइपलाइन लगाने पर भी गंभीर सवाल उठाए गए और इसकी जांच की मांग की गई।
5 प्रमुख मांगें:
1. चौपाटी प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई जाए।
2. जिम्मेदार अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए।
3. राजनीतिक दबाव में निर्णय लेने वालों की भूमिका की जांच हो।
4. भविष्य के लिए स्पष्ट नीति जारी की जाए।
5. वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना किसी भी दुकान को न हटाया जाए।
7 दिनों में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी:
एजाज़ ढेबर ने सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा—
“यदि उचित निर्णय नहीं लिया गया तो हम लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे और आवश्यकता पड़ी तो मुख्यमंत्री निवास का घेराव भी करेंगे।”इस पूरे मामले पर अब नज़रें सरकार और नगरीय प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।