नई दिल्ली। देश में 10 दिन से भी कम समय में तीसरी बार पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। ताजा संशोधन के तहत पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर वैश्विक ईंधन बाजार पर दिख रहा है।
आखिर बार-बार क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, परिवहन लागत और टैक्स संरचना का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई चेन पर असर के कारण तेल कंपनियों की लागत बढ़ी है, जिसके चलते कीमतों में लगातार संशोधन किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि मई महीने में अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हो चुकी है। सरकारी तेल कंपनियां बढ़ती लागत और घाटे की भरपाई के लिए चरणबद्ध तरीके से दाम बढ़ा रही हैं।
दूसरे देशों में कितना बढ़ा ईंधन, भारत कहां खड़ा?
वैश्विक तुलना में कई देशों में ईंधन की कीमतें भारत से ज्यादा तेजी से बढ़ी हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार—
देश
पेट्रोल वृद्धि डीजल वृद्धि
म्यांमार
89.7% 112.7%
पाकिस्तान
54.9% 44.9%
यूएई
52.4% 86.1%
अमेरिका
44.5% 48.1%
चीन
21.7%। 23.7%
फ्रांस
20.9%
31%
जापान
9.7%
11.2%
भारत
4.2%
4.4%
इन आंकड़ों के अनुसार भारत में कीमतों में बढ़ोतरी कई बड़े देशों की तुलना में कम रही है, हालांकि लगातार बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई दे रहा है। परिवहन महंगा होने से खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
महंगाई के इस दौर में लगातार बढ़ते ईंधन दामों ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि पेट्रोल-डीजल की कीमतें सीधे तौर पर बाजार और घरेलू बजट दोनों को प्रभावित करती हैं।