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आशीष तिवारी

165 करोड़ की जमीन, 3500 सदस्य और जवाबदेही पर सवाल! बंगाली कालीबाड़ी समिति में अध्यक्ष तन्मय चटर्जी और सचिव पार्थ कुमार सरकार की कार्यशैली को लेकर घमासान, 165 करोड़ की संपत्ति वाली बंगाली कालीबाड़ी समिति सवालों के घेरे में, अध्यक्ष तन्मय चटर्जी और सचिव पार्थ कुमार सरकार पर मनमानी के आरोप,

3500 सदस्यों की संस्था में हिसाब-किताब और पारदर्शिता पर उठे सवाल, दुर्गा पूजा के लाखों के खर्च का विवरण अब तक नहीं मिलने का दावा; 12 नवंबर की आमसभा को लेकर भी नाराजगी....

रायपुर। मध्य भारत की प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक धार्मिक-सामाजिक संस्था बंगाली कालीबाड़ी समिति रायपुर इन दिनों अपने आंतरिक विवादों और कथित प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। वर्ष 1929 में स्थापित इस संस्था की करीब ढाई एकड़ जमीन, 3500 सदस्य और करोड़ों रुपये की संपत्ति के बीच अब समिति के संचालन, वित्तीय पारदर्शिता तथा निर्वाचित पदाधिकारियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

समिति के असंतुष्ट सदस्यों ने वर्तमान अध्यक्ष तन्मय चटर्जी और सचिव पार्थ कुमार सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि समिति का संचालन छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 एवं संस्था के नियमों की भावना के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। सदस्यों का कहना है कि जिस संस्था की स्थापना सामाजिक, धार्मिक और सामुदायिक हितों के लिए हुई थी, वहां अब आम सदस्यों की भागीदारी और जवाबदेही को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।

16 महीने बाद आमसभा, कार्यप्रणाली पर सवाल:

सदस्यों के अनुसार समिति की अंतिम

जनसाधारण सभा जुलाई 2025 में आयोजित हुई थी। इसके लगभग 16 महीने बाद आगामी 12 नवंबर 2026 को दोबारा आमसभा बुलाने की सूचना दी गई है। सदस्यों का आरोप है कि इतने लंबे अंतराल के बाद बैठक बुलाना संस्था के निर्धारित नियमों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।

आमसभा का समय गुरुवार दोपहर 12 बजे निर्धारित किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। असंतुष्ट सदस्यों का कहना है कि कार्यदिवस में दोपहर के समय बैठक रखने से नौकरीपेशा सदस्यों के लिए शामिल होना मुश्किल होगा। उनका सवाल है कि जब संस्था में लगभग 3500 सदस्य हैं, तो आमसभा ऐसे समय क्यों नहीं रखी जाती, जिसमें अधिक से अधिक सदस्य अपनी बात रख सकें?

दुर्गा पूजा के लाखों रुपये के खर्च का हिसाब कहां?

विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू दुर्गा पूजा के आयोजन और उसके वित्तीय लेखा-जोखा को लेकर है। सदस्यों का आरोप है कि वर्ष 2025 में दुर्गा पूजा के दौरान लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी आम सदस्यों के सामने खर्च का विस्तृत हिसाब प्रस्तुत नहीं किया गया है।

इतना ही नहीं, सदस्यों ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2026 की दुर्गा पूजा भी जनसाधारण सभा की अनुमति के बिना आयोजित कराई गई। इस आयोजन में आम सदस्यों और दानदाताओं से प्राप्त राशि खर्च होने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि दान में प्राप्त राशि का पूरा हिसाब, आय-व्यय का विवरण और ऑडिट रिपोर्ट सदस्यों के सामने कब रखी जाएगी?

पुराने प्रस्तावों पर अमल नहीं, सदस्यों की शिकायतें भी बेअसर!

असंतुष्ट सदस्यों का कहना है कि जुलाई 2025 की जनसाधारण सभा में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए थे, लेकिन वर्तमान कार्यकारिणी द्वारा उन प्रस्तावों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। सदस्यों का यह भी आरोप है कि समिति से संबंधित दस्तावेजों, वित्तीय विवरणों और अन्य जानकारियों की मांग करने के बावजूद उन्हें निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता।

यदि समिति 3500 सदस्यों के सहयोग और विश्वास से संचालित होती है, तो सदस्यों को जानकारी देने में आखिर परेशानी क्यों हो रही है? यह सवाल अब संस्था के भीतर चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

पंजीयक फर्म एवं संस्थाएं विभाग की भूमिका पर भी सवाल:

समिति के सदस्यों का दावा है कि पिछले कई वर्षों से अध्यक्ष और सचिव सहित संबंधित पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर पंजीयक फर्म एवं संस्थाएं, छत्तीसगढ़ शासन के समक्ष कई शिकायतें प्रस्तुत की गई हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक अपेक्षित कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है।

सदस्यों ने विभाग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और संस्था के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

न्यायालयों में भी विचाराधीन हैं मामले:

असंतुष्ट सदस्यों के अनुसार समिति के पदाधिकारियों की कार्यशैली और संस्था के संचालन से जुड़े विवादों को लेकर विभिन्न न्यायालयों में परिवाद दायर किए गए हैं। कुछ मामले वर्तमान में विचाराधीन बताए जा रहे हैं। हालांकि इन मामलों में न्यायालय का अंतिम निर्णय आना शेष है।

इस्तीफे की तैयारी में कार्यकारिणी के कुछ सदस्य!

समिति के भीतर बढ़ते असंतोष के बीच एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ रहा है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि अध्यक्ष तन्मय चटर्जी और सचिव पार्थ कुमार सरकार की कार्यशैली से असंतुष्ट कुछ वर्तमान कार्यकारिणी सदस्य एवं पदाधिकारी आगामी आमसभा से पहले अपने पदों से इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं।

वहीं, आम सदस्यों और महिला सदस्यों के बीच भी वर्तमान कार्यकारिणी के कामकाज को लेकर विरोध बढ़ने की बात सामने आ रही है। असंतुष्ट सदस्य संबंधित विभागों और अन्य वैधानिक मंचों पर अपनी शिकायतें रखने की तैयारी में हैं।

अब जवाबदेही तय करने और निष्पक्ष चुनाव की मांग:

समिति के असंतुष्ट सदस्यों की प्रमुख मांग है कि संस्था के पिछले वर्षों के आय-व्यय का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए, दुर्गा पूजा सहित सभी आयोजनों का पूरा वित्तीय विवरण सार्वजनिक किया जाए, आमसभा में पारित प्रस्तावों पर अमल सुनिश्चित हो तथा सदस्यों को नियमानुसार जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

इसके साथ ही पंजीयक विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्ष 1929 में स्थापित बंगाली कालीबाड़ी जैसी ऐतिहासिक संस्था में आखिर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या अध्यक्ष तन्मय चटर्जी और सचिव पार्थ कुमार सरकार सदस्यों के सवालों का जवाब देंगे? क्या दुर्गा पूजा के लाखों रुपये के खर्च का पूरा हिसाब आमसभा में प्रस्तुत होगा? और क्या पंजीयक विभाग इन शिकायतों पर निष्पक्ष जांच कराएगा?

अब 12 नवंबर की आमसभा पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यह बैठक केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है या संस्था के भीतर उठ रहे सवालों का जवाब मिलता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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