साहित्य और संस्कृति का संगम: रायपुर साहित्य उत्सव में डॉ. लूनेश कुमार वर्मा की कृति ‘एक लोटा पानी’ का भव्य विमोचन, कवि-सम्मान से गूंजा विनोद कुमार शुक्ल मंडप....
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में आयोजित रायपुर साहित्य उत्सव – आदि से अनादि का त्रिदिवसीय आयोजन 23 से 25 जनवरी 2026 तक नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस साहित्यिक महोत्सव में देशभर से आए विद्वानों, साहित्यकारों और कलाकारों ने विभिन्न मंडपों में विचार-विमर्श, संवाद सत्र और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा को जीवंत किया।
कार्यक्रम के तृतीय दिवस विनोद कुमार शुक्ल मंडप में संविधान और भारतीय मूल्य विषय पर रोचक संवाद सत्र आयोजित हुआ, जिसने श्रोताओं को गहन चिंतन की ओर प्रेरित किया। इसी मंच पर संस्कृत, हिंदी और छत्तीसगढ़ी साहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके रायपुर के साहित्यकार डॉ. लूनेश कुमार वर्मा के हिंदी कविता संग्रह ‘एक लोटा पानी’ का भव्य विमोचन संपन्न हुआ। यह विमोचन शिव प्रकाश, हितेश शंकर, गुरुप्रकाश, डॉ. भूपेंद्र करवंदे और शशांक शुक्ला के कर-कमलों से हुआ। यह संग्रह भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों को केंद्र में रखकर रचित संवेदनशील कविताओं का सशक्त संकलन है।
डॉ. लूनेश कुमार वर्मा का साहित्यिक योगदान बहुआयामी रहा है। संस्कृत में उनकी कृतियाँ ‘मोहनदास:’ और ‘तिरिछ:’ प्रकाशित हो चुकी हैं, वहीं हिंदी में ‘जीवन एक नदिया है’, ‘मन का दर्पण’ जैसे कविता संग्रह तथा ‘खिलता पुष्प’, ‘राम अपने धाम’, ‘नव प्रभात’, ‘नई उड़ान’ जैसे हाइकु संग्रह पाठकों के बीच लोकप्रिय हैं। छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा उनका छत्तीसगढ़ी हाइकु संग्रह ‘माटी के दीया’ पहले ही माननीय मुख्यमंत्री के कर-कमलों से विमोचित हो चुका है। इन सभी कृतियों को रायपुर साहित्य उत्सव में पाठकों का भरपूर स्नेह और सराहना मिली।
साहित्य उत्सव में पूर्ण निष्ठा, समर्पण और उत्साहपूर्ण सहभागिता तथा ओपन माइक मंच पर श्रेष्ठ काव्य पाठ के लिए डॉ. वर्मा को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। वे वर्तमान में शिक्षा विभाग में व्याख्याता के रूप में स्व. श्री आशाराम डहरिया शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, छछानपैरी (जिला रायपुर) में सेवाएं दे रहे हैं। संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रहे डॉ. वर्मा संस्कृत भारती, रायपुर महानगर के अध्यक्ष भी हैं।
उनकी रचनात्मक यात्रा सतत गतिमान है। उनके लेख और आलेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित हो रहे हैं, जो साहित्य प्रेमियों के बीच उनकी सशक्त उपस्थिति और प्रभाव को और भी दृढ़ बनाते हैं।
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