राजधानी में संस्कृतभारती प्रांत विद्वत्परिषद के द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा पर विचार गोष्ठी एवं संवाद सत्र का सफल आयोजन....
रायपुर। बसंत ऋतु में विविध कार्यक्रमों का आयोजन स्थान-स्थान पर आनंद और उल्लास पूर्वक किया जाता है। इसी तारतम्य में संस्कृतभारती प्रांत विद्वत्परिषद के द्वारा वसन्त पंचमी के उपलक्ष्य में विचार गोष्ठी एवं संवाद सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित साहित्यिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध वृंदावन सभागार में माघशुक्ल तृतीया, 21 जनवरी दिन बुधवार को समय सायंकाल ६:०० से ७:३० बजे आयोजित किया गया।
संस्कृत भारती महानगर रायपुर के अध्यक्ष डॉ. लूनेश कुमार वर्मा ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य विषय भारतीय-ज्ञान-परंपरा पर आधारित विचार-विमर्श था। कार्यक्रम में संवाद सत्र का भी आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने भी अपने-अपने विचार रखा। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में जनजातीय कार्य प्रमुख श्री सतीश गोकुल पंडा और मुख्य अतिथि के रूप में श्री हिमांशु द्विवेदी रहे। कार्यक्रम का संचालन संस्कृत भारती छत्तीसगढ़ विद्वत् परिषद् प्रमुख डॉ. बहुरन सिंह पटेल ने किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप बोलते हुए हिमांशु द्विवेदी ने देश में ज्ञान की ज्योति जलाने वाले शिक्षकों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक देश में शिक्षकों को बराबर सम्मान न मिले, उन्हें उनके मूल काम से इतर अन्य अधिक सौंपे जाते हों, तो हम अपनी ज्ञान परंपरा पर कैसे गर्व कर सकते हैं? नई शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा पर बल दिया गया है। यह काम संस्कृत साहित्य के समुचित अध्ययन से ही संभव हो सकता है।
कार्यक्रम में संवाद सत्र का संचालन करते हुए जनजातीय कार्य प्रमुख श्री सतीश गोकुल पंडा ने भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने वाले अनेक प्रसंगों पर उपस्थित विद्वानों के विचार आमंत्रित किए। उन्होंने अपने वक्तव्य में इस बात को रेखांकित किया कि हमारे देश में हिंदू शब्द की आवश्यकता ही नहीं थी। बाह्य आक्रमण के फलस्वरूप देशीय लोगों के द्वारा हिंदू शब्द का व्यवहार होने लगा। विश्व धर्म को मानव धर्म से बनाना है, तो हमें आवश्यक है इस भारतीय ज्ञान परंपरा को वापस उसे शिखर तक पहुंचाना पड़ेगा। जिसकी भूमिका संस्कृत और भारतीय संस्कृति ही भली भांति करने समर्थ है। कार्यक्रम में अध्यक्षीय उद्बोधन कृषि वैज्ञानिक सत्येंद्र सिंह सेंगर ने किया।
कार्यक्रम में संस्कृत भारती से हेमंत साहू, प्रवीण झाड़ी, व्यास आर्य, वैभव कान्हे, दिव्या देशपांडे, पारस साहू, पीला राम साहू, अनुपमा टंडन सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित थे। प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों के शिक्षकों के साथ-साथ समाज के प्रबुद्ध नागरिक भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में लोगों की अधिक से अधिक संख्या में उपस्थिति भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण का ठोस प्रमाण सिद्ध हुआ।
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