जगदलपुर/बस्तर संभाग के चर्चित कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल पर अब बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की तलवार लटक गई है। अस्पताल प्रबंधन डॉक्टरों, नर्सों और अन्य मेडिकल स्टाफ की विधिवत तैनाती से जुड़े जरूरी दस्तावेज स्वास्थ्य विभाग को तय समयसीमा में उपलब्ध नहीं करा पाया है। इसके बाद अब अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, बस्तर कलेक्टर की अनुमति मिलते ही निरस्तीकरण (लाइसेंस कैंसिल) की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
15 दिन की मोहलत खत्म, जवाब नहीं
जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग ने करीब 15 दिन पहले कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल प्रबंधन से स्टाफ संबंधी प्रमाणित दस्तावेज मांगे थे। इनमें विशेष रूप से शामिल थे:
पदस्थ डॉक्टरों की वैध डिग्री व रजिस्ट्रेशन
नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति संबंधी रिकॉर्ड
आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर में तैनात तकनीकी कर्मचारियों का विवरण
लेकिन विभाग को तय समयसीमा में संतोषजनक दस्तावेज नहीं मिले।
नियम क्या कहते हैं — सिर्फ रजिस्टर्ड डॉक्टर ही कर सकते हैं इलाज
राज्य में चिकित्सा पेशे को नियंत्रित करने वाले छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के नियमों के अनुसार केवल पंजीकृत (रजिस्टर्ड) चिकित्सक ही अस्पताल में इलाज कर सकते हैं। हर डॉक्टर के लिए अपना वैध रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज कराना अनिवार्य है।
नियमोंके उल्लंघन की स्थिति में चिकित्सकों का पंजीकरण निलंबित या निरस्त किया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल अब तक स्वास्थ्य विभाग को अपने यहां कार्यरत चिकित्सकों के नामों की पूरी सूची उपलब्ध नहीं करा सका है। इतना ही नहीं, संबंधित चिकित्सकों के छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण नंबर की जानकारी भी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है।
आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर के मानकों पर भी सवाल
जांच के दौरान यह भी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ सका कि कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल के आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर निर्धारित चिकित्सा मानकों के अनुरूप हैं या नहीं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जब तक प्रशिक्षित और अधिकृत स्टाफ की वैध तैनाती साबित नहीं होती, तब तक गंभीर चिकित्सा सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी क्या बोले
स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि“अस्पताल से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन समयसीमा के भीतर पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। अब अगली वैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर स्तर से अनुमति मिलने के बाद लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।”
मामला मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह मामला सिर्फ कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा, उपचार की गुणवत्ता और वैध चिकित्सा प्रैक्टिस से सीधे जुड़ा हुआ है। यदि अस्पताल में तैनात स्टाफ का सत्यापन नहीं होता, तो गंभीर इलाज, सर्जरी और आपात सेवाओं की वैधता पर भी प्रश्न उठते हैं।
अब आगे क्या?
कलेक्टर स्तर से हरी झंडी मिलते ही
कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल को अंतिम नोटिस
संतोषजनक जवाब न मिलने पर लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई संभव
इस घटनाक्रम ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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