विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को लेकर जुटेंगे 30 महाविद्यालयों के प्राचार्य, नेतृत्व क्षमता और शैक्षणिक उत्कृष्टता पर होगा मंथन, IIM रायपुर के निदेशक प्रो. संजीव पाराशर होंगे मुख्य अतिथि एवं की-नोट स्पीकर, कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला करेंगे समापन....
रायपुर। उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप, शैक्षणिक गुणवत्ता और संस्थागत उत्कृष्टता को नई दिशा देने के उद्देश्य से निजी महाविद्यालय प्राचार्य कल्याण संघ द्वारा 4 नवंबर को सेंट विंसेंट पैलौटी कॉलेज, रायपुर में एक दिवसीय प्राचार्य कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। "लीडरशिप फॉर एक्सीलेंस: एंपावरिंग प्रिंसिपल्स फॉर विकसित भारत 2047" विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में शहर के लगभग 30 महाविद्यालयों के प्राचार्य शामिल होंगे।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि एवं की-नोट स्पीकर भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर के निदेशक प्रोफेसर संजीव पाराशर होंगे। उनके मार्गदर्शन में उच्च शिक्षा में नेतृत्व की भूमिका, संस्थागत विकास और उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में रिसोर्स पर्सन के रूप में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव प्रोफेसर एस.के. पांडे अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे। वहीं द्वितीय सत्र में पंडित सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर बी.जी. सिंह मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। कार्यशाला के समापन समारोह के मुख्य अतिथि पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला होंगे।
आयोजक महाविद्यालय सेंट विंसेंट पैलौटी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. कुलदीप दुबे ने बताया कि वर्तमान समय में शिक्षा का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। ऐसे में केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियां ही नहीं, बल्कि महाविद्यालयों का नेतृत्व करने वाले प्राचार्यों की प्रबंधन क्षमता, दूरदर्शिता और निर्णय लेने की दक्षता भी संस्थान की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
निजी महाविद्यालय प्राचार्य कल्याण संघ के अध्यक्ष डॉ. मेघेष तिवारी एवं सचिव डॉ. देवाशीष मुखर्जी ने कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में उच्च शिक्षा संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए आवश्यक है कि प्राचार्यों को आधुनिक शैक्षणिक चुनौतियों, नेतृत्व कौशल और संस्थागत उत्कृष्टता के अनुरूप सशक्त बनाया जाए। इसी सोच के साथ इस कार्यशाला की परिकल्पना की गई है।
इस कार्यशाला में लगभग 30 महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने अपनी सहभागिता की सहमति दी है। उम्मीद है कि यह आयोजन उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर नेतृत्व, नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्थागत विकास के नए आयामों पर सार्थक संवाद का मंच बनेगा।
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