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SUBHASH RATTANPAL
सुभाष रतनपाल



बस्तर। जिले के करपावंड क्षेत्र में निजी भूमि पर वर्षों से चले आ रहे कब्जे के विवाद ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब न्यायालयों के आदेश के पालन में भूमि का कब्जा दिलाने पहुंची राजस्व विभाग की टीम का ग्रामीणों के एक समूह ने विरोध कर दिया। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ धक्कामुक्की, मारपीट, तोड़फोड़ तथा शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने की घटना हुई, जिसमें कुछ लोगों को चोटें भी आई हैं। मामले में पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि अन्य आरोपितों की पहचान की जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार करपावंड निवासी शेराराम चौधरी ने अपनी खरीदी हुई निजी भूमि पर कुछ लोगों द्वारा कब्जा किए जाने की शिकायत राजस्व विभाग में की थी। इस संबंध में उन्होंने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 250 के तहत प्रकरण प्रस्तुत किया था। मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित भूमि के स्वामित्व एवं कब्जे को लेकर विभिन्न स्तरों पर न्यायिक प्रक्रिया चली।


सूत्रों के अनुसार सबसे पहले तहसील न्यायालय में प्रकरण की सुनवाई हुई, जहां फैसला भूमि स्वामी शेराराम चौधरी के पक्ष में आया। इसके बाद मामला अपील के रूप में एसडीएम न्यायालय पहुंचा, जहां भी पूर्व आदेश को बरकरार रखा गया। बाद में प्रकरण कमिश्नर न्यायालय तथा पुनर्विवेचना के लिए राजस्व न्यायालय तक पहुंचा, लेकिन सभी स्तरों पर फैसला भूमि स्वामी के पक्ष में ही रहा। चार अलग-अलग न्यायिक स्तरों पर निर्णय आने के बाद प्रशासन को भूमि स्वामी को वास्तविक कब्जा दिलाने की प्रक्रिया पूरी करनी थी।

बताया जा रहा है कि इसी क्रम में तहसीलदार रूपेश मरकाम द्वारा आदेश जारी कर राजस्व अमले को संबंधित भूमि का सीमांकन एवं कब्जा दिलाने की कार्रवाई करने निर्देशित किया गया था। आदेश के पालन में राजस्व विभाग की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी वहां एकत्र हो गए।


प्रत्यक्षदर्शियों एवं प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जब राजस्व कर्मचारी भूमि का सीमांकन और माप-जोख कर रहे थे, तभी कुछ लोगों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर राजस्व अमले के साथ धक्कामुक्की, झूमाझटकी और अभद्र व्यवहार किया गया। आरोप है कि सीमांकन कार्य में उपयोग किए जा रहे राजस्व विभाग के माप उपकरण (मीटर) को भी खींच लिया गया तथा सरकारी कार्य को बाधित करने का प्रयास किया गया।


मौके पर मौजूद अधिकारियों के अनुसार स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई थी। विरोध कर रहे लोगों द्वारा कार्रवाई रुकवाने का प्रयास किया गया, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुआ। घटना के दौरान कुछ कर्मचारियों और संबंधित पक्ष के लोगों को मामूली एवं गंभीर चोटें आने की भी जानकारी सामने आई है।


स्थिति को देखते हुए मौके पर तैनात पुलिस बल और महिला पुलिस कर्मियों ने मोर्चा संभाला तथा भीड़ को नियंत्रित किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने समझाइश देकर स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास किया, जिसके बाद आगे की कार्रवाई पूरी की जा सकी।


राजस्व अधिकारियों ने पुष्टि की है कि कार्रवाई न्यायालयों के आदेश और विधिवत राजस्व प्रक्रिया के तहत की जा रही थी। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाना, अधिकारियों के साथ धक्कामुक्की करना तथा शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाना गंभीर विषय है, जिसकी जांच की जा रही है।


घटना के बाद पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा डालने, कानून-व्यवस्था प्रभावित करने तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत कई लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उन अज्ञात लोगों की पहचान भी की जा रही है, जिन्होंने कथित रूप से घटना में सक्रिय भूमिका निभाई थी।


प्रशासन का कहना है कि न्यायालयों के आदेशों का पालन कराना उसकी जिम्मेदारी है और किसी भी पक्ष को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।


फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन एहतियात के तौर पर पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है तथा मामले की विस्तृत जांच जारी है।

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