शासकीय जमीन पर कब्जे की कोशिश! विरोध के बाद हरकत में निगम, दोबारा सीमांकन के निर्देश, प्रोफेसर कॉलोनी में भैया तालाब के पास जमीन को निजी बताकर बेचने की तैयारी का आरोप, 60 फीट सड़क की जमीन पर भी कब्जे की आशंका; जोन कमिश्नर ने तहसीलदार को लिखा पत्र...
रायपुर। राजधानी के प्रोफेसर कॉलोनी सेक्टर-1 में भैया तालाब के पास स्थित शासकीय जमीन को निजी बताकर कब्जा करने और बेचने की कोशिश का मामला सामने आया है। मोहल्लेवासियों के विरोध और लगातार शिकायतों के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया है। जोन-6 के कमिश्नर ने जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए तहसीलदार को पत्र लिखकर दोबारा पारदर्शी तरीके से सीमांकन कराने कहा है। प्रारंभिक जांच में संबंधित जमीन के खसरा नंबर का ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड से मिलान नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में अब सीमांकन के बाद ही जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ऑनलाइन रिकॉर्ड से नहीं हो रहा खसरा नंबर का मिलान:
मोहल्लेवासियों शुभांकर पांडेय, ईश्वर यादव, हेमंत, सीमा सहित अन्य लोगों ने शिकायत में आरोप लगाया है कि भैया तालाब के पास खाली पड़ी शासकीय जमीन पर कुछ लोग कब्जा कर उसे बेचने की तैयारी कर रहे हैं। मामले की जानकारी मिलने पर स्थानीय लोगों ने जोन कार्यालय से लेकर तहसील कार्यालय तक शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद जोन कमिश्नर ने मामले की प्रारंभिक जांच के लिए इंजीनियरों की टीम भेजी।
जांच के दौरान जिस जमीन को संबंधित लोग अपने खसरा नंबर की बता रहे हैं, उसका ऑनलाइन रिकॉर्ड से मिलान नहीं होने की बात सामने आई। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संबंधित खसरा नंबर की जमीन पर ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार पहले ही मकान का निर्माण दर्ज है। ऐसे में जमीन के दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई है।
60 फीट सड़क की जमीन पर भी कब्जे की आशंका:
इस मामले का एक गंभीर पहलू यह भी है कि विवादित जमीन का कुछ हिस्सा मोहल्ले की लगभग 60 फीट चौड़ी सड़क के दायरे में आने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क का संबंधित हिस्सा अभी पक्का नहीं बना है। आरोप है कि इसी स्थिति का फायदा उठाकर सड़क की जमीन पर भी कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। मोहल्लेवासियों ने यह भी बताया कि सार्वजनिक जमीन की सुरक्षा के लिए लगाया गया बोर्ड उखाड़कर फेंक दिया गया।
शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि शासकीय जमीन का स्वरूप बदलकर और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे उसे निजी बताकर बेचने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि आधिकारिक सीमांकन और दस्तावेजों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
सीमांकन के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई:
जोन-6 के कमिश्नर हितेंद्र यादव ने बताया कि जमीन को लेकर शिकायत मिली है। प्रारंभिक जांच में जमीन शासकीय प्रतीत होती है। इसलिए तहसीलदार को पत्र लिखकर दोबारा पारदर्शी तरीके से सीमांकन कराने कहा गया है। सीमांकन के बाद जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब सभी की निगाहें राजस्व विभाग के सीमांकन पर टिकी हैं। इससे स्पष्ट होगा कि विवादित जमीन शासकीय है या निजी और सड़क के हिस्से को लेकर लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है। स्थानीय लोगों की मांग है कि जांच निष्पक्ष हो, जमीन के रिकॉर्ड सार्वजनिक तथ्यों के आधार पर परखे जाएं और यदि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
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