जगदलपुर। कांग्रेस पार्टी द्वारा 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित की जा रही ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली को लेकर भाजपा अध्यक्ष पूर्वी मंडल अविनाश श्रीवास्तव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र बचाने का ढोंग करने से पहले कांग्रेस को देश में लगातार घटते अपने जनाधार और जनता के बीच गिरती साख की चिंता करनी चाहिए।
कांग्रेस जब-जब राजनीतिक रूप से कमजोर होती है, तब-तब संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास करती है। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को अपने दावों के समर्थन में ठोस तथ्य प्रस्तुत करने चाहिए। केवल आरोप लगाकर किसी संस्था की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
अविनाश श्रीवास्तव ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनावी नारों से नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान, जनादेश की स्वीकार्यता और जनता के विश्वास से मजबूत होता है। कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और जनता का फैसला स्वीकार करना ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है।
रेलवे द्वारा स्पेशल ट्रेन उपलब्ध कराने के मुद्दे पर कांग्रेस की नाराजगी को लेकर भाजपा ने कहा कि किसी भी परिवहन सुविधा की उपलब्धता निर्धारित नियमों, परिचालन संबंधी परिस्थितियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अधीन होती है। इस विषय पर तथ्यों को स्पष्ट किए बिना राजनीतिक साजिश का आरोप लगाना उचित नहीं है। कांग्रेस को अपनी राजनीतिक गतिविधियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने के बजाय हर परिस्थिति को राजनीतिक मुद्दा बनाने की प्रवृत्ति पर आत्ममंथन करना चाहिए।
कांग्रेस को देश की जनता को यह बताना चाहिए कि वह वास्तव में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आंदोलन कर रही है या फिर अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए नए-नए मुद्दों की तलाश में है। लोकतंत्र के नाम पर रैली करने से जनता का विश्वास वापस नहीं मिलता; इसके लिए जनहित के मुद्दों पर काम करना, जवाबदेही स्वीकार करना और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना आवश्यक है।
अंततः कांग्रेस को समझना चाहिए कि लोकतंत्र बचाने का दावा करने से पहले जनता का विश्वास जीतना जरूरी है। देश की जनता जागरूक है और वह राजनीतिक नारों तथा वास्तविक जनसेवा के बीच अंतर करना अच्छी तरह जानती है। कांग्रेस को लोकतंत्र की चिंता के साथ-साथ अपनी गिरती राजनीतिक साख की भी गंभीर समीक्षा करनी चाहिए।
Subscribe our newsletter to stay updated