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छत्तीसगढ

“सरकारी जमीन पर टाउनशिप! रायपुर की स्वर्णभूमि परियोजना पर गंभीर आरोप – अतिक्रमण, अवैध प्लॉटिंग और टैक्स हेरफेर की शिकायत से मचा हड़कंप”

रायपुर।राजधानी रायपुर की चर्चित स्वर्णभूमि टाउनशिप को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। टाउनशिप के डेवलपर Fortune Resources Pvt. Ltd. पर अवैध निर्माण, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण, अनधिकृत प्लॉटिंग और प्लॉट बिक्री में भारी मूल्य हेरफेर जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस पूरे मामले की शिकायत राज्य सरकार को भेजते हुए छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरूण साव से उच्चस्तरीय जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायत में टाउनशिप के डायरेक्टर्स राजेश अग्रवाल और पवन अग्रवाल पर कई नियमों और शहरी नियोजन प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि परियोजना को अलग-अलग चरणों में सरकारी मंजूरी मिलने के बावजूद स्वीकृत लेआउट और नियमों से हटकर कई निर्माण और गतिविधियां की गई हैं।

चार चरणों में मिली थी परियोजना को मंजूरी:

शिकायत के अनुसार स्वर्णभूमि टाउनशिप को चार चरणों में अनुमति मिली थी—

चरण-1:अनुमोदन संख्या 848 (24 फरवरी 2012)

चरण-2:अनुमोदन संख्या 822 (21 जनवरी 2021)

चरण-3: अनुमोदन संख्या 5389 (2 नवंबर 2022)

चरण-4:अनुमोदन संख्या 3186 (4 अक्टूबर 2023)

लेकिन इन स्वीकृतियों के बावजूद परियोजना में कई ऐसी गतिविधियां होने का आरोप है जो स्वीकृत नक्शे और नियमों के विपरीत बताई जा रही हैं।

सरकारी जमीन पर गेट और लैंडस्केपिंग का आरोप

सबसे गंभीर आरोप यह है कि टाउनशिप का मुख्य प्रवेश द्वार और लैंडस्केपिंग खसरा नंबर 156 पर बनाई गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि यह जमीन इरिगेशन विभाग की है और सरकारी रिकॉर्ड में इसे नाले (ड्रेनेज चैनल) के रूप में दर्ज किया गया है।

आरोप है कि बिना अनुमति इस सरकारी जमीन पर कब्जा कर निर्माण किया गया है, जो सीधा अतिक्रमण की श्रेणी में आता है। शिकायत के साथ खसरा रिकॉर्ड, बी-1 कॉपी, साइट फोटो और गूगल मैप मार्किंग जैसे दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं।

"नाले के पास वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट:

शिकायत में यह भी कहा गया है कि सरकारी नाले के पास वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है, जिसमें आवश्यक बफर ज़ोन का पालन नहीं किया गया। इसे पर्यावरणीय सुरक्षा और शहरी नियोजन नियमों का उल्लंघन बताया गया है।

विधानसभा रोड से अनधिकृत एंट्री:

आरोप है कि टाउनशिप को विधानसभा मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए एक कंक्रीट एंट्री रोड बनाई गई है, जिसके लिए किसी प्रकार की आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई। शिकायत में इसे पूरी तरह अनधिकृत प्रवेश मार्ग बताया गया है।

फेज-2 और फेज-3 में भी अनियमितताओं के आरोप:

शिकायत में कहा गया है कि फेज-2 से बड़े और बिनामंजूरी प्लॉटों तक पहुंच दी गई है, जहां कई मकान बन चुके हैं। बताया गया है कि ये मकान आधिकारिक कॉलोनी का हिस्सा नहीं हैं, फिर भी कॉलोनी की सड़कों और सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं।

वहीं फेज-3 से रिंग रोड नंबर-3 तक एक सड़क बनाए जाने का भी आरोप है, जिसके लिए किसी प्रकार की मंजूरी नहीं ली गई।

फेज-4 की सड़कों का इस्तेमाल अवैध प्लॉटिंग में:

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि फेज-4 की अंदरूनी सड़कों का उपयोग बिनामंजूरी प्लॉटिंग के लिए किया जा रहा है। आरोप है कि मंजूर लेआउट में जिन स्थानों पर सड़कें और सार्वजनिक सुविधाएं दर्शाई गई थीं, वहां अलग तरीके से प्लॉट काटे जा रहे हैं।

RERA नियमों के उल्लंघन की आशंका:

शिकायतकर्ता का कहना है कि डेवलपर ने रजिस्टर्ड सोसायटी से NOC लिए बिना कॉलोनी की यूटिलिटी का उपयोग कर प्लॉट तैयार किए हैं। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए अनिवार्य आवास और खुले स्थानों का भी पर्याप्त प्रावधान नहीं किया गया, जिससे RERA और शहरी विकास नीति के उल्लंघन की आशंका जताई गई है।

प्लॉट बिक्री में मूल्य हेरफेर का आरोप:

शिकायत में एक और बड़ा आरोप लगाया गया है कि टाउनशिप में प्लॉट लगभग 6000 रुपये प्रति वर्गफुट की दर से बेचे जा रहे हैं, जबकि रजिस्ट्री में उनकी कीमत करीब 1000 रुपये प्रति वर्गफुट दिखाई जा रही है।

शिकायतकर्ता के अनुसार यह कम मूल्यांकन कर टैक्स चोरी और अनअकाउंटेड कैश लेनदेन का मामला हो सकता है, जिससे राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान की आशंका है।

कई विभागों को भेजी गई शिकायत:

पूरे मामले की शिकायत राज्य सरकार के साथ-साथ राजस्व विभाग, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग, मुख्य सचिव कार्यालय, जिला प्रशासन रायपुर, जीएसटी विभाग, आयकर विभाग और नगर निगम रायपुर को भी भेजी गई है।

शिकायत के साथ गूगल मैप मार्किंग, साइट फोटोग्राफ, लेआउट अप्रूवल, मास्टर प्लान भूमि उपयोग दस्तावेज और जियोटैग्ड इमेज सहित कई साक्ष्य भी संलग्न किए गए हैं।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों की जांच किस स्तर पर करता है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।

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