रायपुर प्रेस क्लब के साथियों, अब करो प्रहार, पत्रकार चुनो, पत्रकारिता के सौदागर नहीं! – सुनील नामदेव
रायपुर।पत्रकार साथियों, रायपुर प्रेस क्लब का चुनाव कोई साधारण औपचारिक प्रक्रिया नहीं है।यह केवल पद, प्रतिष्ठा या आयोजनों तक सीमित संस्था नहीं, बल्कि पत्रकारों के अस्तित्व, सुरक्षा, स्वतंत्रता और भविष्य से जुड़ा मंच है। दुर्भाग्यपूर्ण सच यह है कि बीते वर्षों में प्रेस क्लब का चुनाव राजनीतिक दलों की विचारधाराओं, सत्ता-समीकरणों और व्यक्तिगत स्वार्थों की भेंट चढ़ता रहा है।अब समय आ गया है कि इस परंपरा को यहीं रोका जाए।
प्रेस क्लब मनोरंजन का मंच नहीं, संघर्ष का औजार है।प्रेस क्लब केवल चाय,कार्यक्रम और फोटो सेशन के लिए नहीं बना है।
यह संस्था इसलिए बनी थी ताकि —
पत्रकारों पर बढ़ते झूठे मुकदमों के खिलाफ सामूहिक आवाज़ उठे धमकी, उत्पीड़न और हमलों में संगठन पत्रकार के साथ खड़ा हो पत्रकारिता के जोखिम कम हों और भविष्य सुरक्षित बने सत्ता से सवाल पूछने वाले पत्रकार को अकेला न छोड़ा जाए।
लेकिन सच्चाई यह है कि—
ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोग सत्ता के रंग में रंगते चले गए पत्रकारों के हितों की जगह निजी समीकरणों को तरजीह दी गई संघर्ष की जगह समझौते होते रहे और प्रेस क्लब धीरे-धीरे मूक दर्शक बनता गया,अब फैसला आपको करना है।
यह चुनाव सिर्फ उम्मीदवारों के बीच नहीं है, यह चुनाव है —
पत्रकार बनाम सौदागर संघर्ष बनाम समझौता स्वतंत्रता बनाम सत्ता की गुलामी
आज यदि आप चुप रहे,तो कल जब—
आप पर फर्जी मुकदमा होगा खबर लिखने पर दबाव पड़ेगा या जेल, थाने, कोर्ट के चक्कर काटने पड़ेंगे,तब यही प्रेस क्लब अगर खामोश रहा,तो जिम्मेदारी भी हमारी ही होगी।
इस बार वोट सोच-समझकर दीजिए
चेहरा नहीं,चरित्र देखिए भाषण नहीं,अब तक का संघर्ष देखिए सत्ता की नज़दीकी नहीं,पत्रकारों के प्रति प्रतिबद्धता देखिए
याद रखिए—
वोट आपका है,फैसला भी आपका है।
लेकिन इसका असर पूरे पत्रकार समाज पर पड़ेगा।
अब वक्त आ गया है कि — पत्रकार चुने जाएँ, पत्रकारिता के सौदागर नहीं।आप सभी से अपील है — ज़रूर सोचें, ज़रूर विचार करें, और सही निर्णय लें।
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