शोध की गुणवत्ता बढ़ाने में संदर्भ प्रबंधन की अहम भूमिका,जे.योगानंदम कॉलेज में कार्यशाला,ज़ोटेरो, मेंडेले और एंडनोट के उपयोग से शोध कार्य को व्यवस्थित व विश्वसनीय बनाने का दिया प्रशिक्षण....
रायपुर। शासकीय जे. योगानंदम छत्तीसगढ़ महाविद्यालय, रायपुर के बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) सेल एवं अनुसंधान समिति के संयुक्त तत्वावधान में संस्थान के शोध छात्रों एवं संकाय सदस्यों के लिए “संदर्भ उपकरण: ज़ोटेरो और मेंडेले” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में शोध लेखन में उचित संदर्भ, अकादमिक ईमानदारी, साहित्यिक चोरी की रोकथाम तथा आधुनिक डिजिटल उद्धरण-प्रबंधन उपकरणों के प्रभावी उपयोग पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया।
कार्यशाला की रिसोर्स पर्सन डॉ. सुपर्णा सेनगुप्ता, पुस्तकालय अध्यक्ष, आयुष एवं आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, नया रायपुर रहीं। उनका औपचारिक परिचय प्रोफेसर मोनिका सिंह, संयोजक, अनुसंधान समिति द्वारा कराया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. सेनगुप्ता ने शोध लेखन में उद्धरण की आवश्यकता और उसकी अकादमिक महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि उचित संदर्भ मूल लेखक को श्रेय देने के साथ शोध की विश्वसनीयता बढ़ाता है और पाठकों को संबंधित स्रोतों तक पहुंचने में मदद करता है। उन्होंने शोधार्थियों को सलाह दी कि जब मूल स्रोत उपलब्ध हो, तब द्वितीयक स्रोत के बजाय प्राथमिक स्रोत का अध्ययन एवं उद्धरण किया जाना चाहिए।
उन्होंने शोध प्रकाशन के लिए विश्वसनीय और प्रतिष्ठित विद्वत पत्रिकाओं के चयन पर भी विशेष जोर दिया। शोध पत्र भेजने से पहले पत्रिका की प्रामाणिकता, संपादकीय प्रक्रिया, सहकर्मी समीक्षा, अनुक्रमणिका संबंधी दावों और प्रकाशन नीतियों की जांच करने की सलाह दी गई। इस दौरान क्लोन एवं शिकारी (प्रीडेटरी) पत्रिकाओं के प्रति शोधकर्ताओं को विशेष रूप से सचेत किया गया, जो प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के नाम, वेबसाइट, लोगो अथवा अन्य विवरणों की नकल कर शोधकर्ताओं को भ्रमित कर सकती हैं।
कार्यशाला में साहित्यिक चोरी (Plagiarism) की रोकथाम को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में शामिल किया गया। डॉ. सेनगुप्ता ने शोधार्थियों को सटीक शोध नोट्स तैयार करने, विचारों को अपने शब्दों में प्रस्तुत करने, उद्धरणों का उचित प्रयोग करने तथा उपयोग किए गए सभी स्रोतों को सही ढंग से संदर्भित करने की व्यावहारिक जानकारी दी। पुस्तकों, शोध पत्रिकाओं, वेबसाइटों और अन्य विद्वत स्रोतों को निर्धारित संदर्भ शैली में उद्धृत करने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को ज़ोटेरो, एंडनोट एवं मेंडेले जैसे प्रमुख संदर्भ-प्रबंधन उपकरणों की उपयोगिता से परिचित कराया गया। इन उपकरणों के माध्यम से शोध स्रोतों को व्यवस्थित करने, संदर्भ सुरक्षित रखने, ग्रंथसूची तैयार करने तथा शोध दस्तावेजों में उद्धरण को आसानी से सम्मिलित करने की प्रक्रिया समझाई गई।
विशेष रूप से माइक्रोसॉफ्ट वर्ड के साथ मेंडेले के व्यावहारिक उपयोग का प्रदर्शन किया गया। प्रतिभागियों को संदर्भ आयात करने, शोध पत्र में उद्धरण जोड़ने, स्वचालित ग्रंथसूची तैयार करने और शोध लेखन के दौरान संदर्भों को व्यवस्थित रखने की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला में महाविद्यालय के विभिन्न शोध केंद्रों के संकाय सदस्यों एवं शोध छात्रों ने सक्रिय सहभागिता की। संवादात्मक एवं व्यावहारिक सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को शोध लेखन की गुणवत्ता, दक्षता और अकादमिक ईमानदारी को मजबूत करने के लिए उपयोगी जानकारी प्राप्त हुई।
कार्यक्रम के अंत में सुदीप सर्वा, सहायक प्राध्यापक, विधि विभाग ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने रिसोर्स पर्सन, महाविद्यालय प्रशासन, आयोजकों, संकाय सदस्यों एवं शोध छात्रों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला के सफल आयोजन में सभी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
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