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SUBHASH RATTANPAL
सुभाष रतनपाल



जगदलपुर। शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर में कुलपति द्वारा लिए जा रहे निर्णयों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। NSUI बस्तर जिलाध्यक्ष विशाल खंबारी ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय में नियमों और प्रशासनिक व्यवस्था को दरकिनार कर मनमाने निर्णय लिए जा रहे हैं।

खंबारी ने कहा कि पिछले वर्ष की विवादित शिक्षक भर्ती से नियुक्त सह-प्राध्यापक अभिषेक अवस्थी, जो अभी परिवीक्षाधीन अवधि में हैं, उन्हें नोटशीट के माध्यम से प्रभारी कुलसचिव की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। सवाल यह है कि अध्यापन के लिए नियुक्त प्राध्यापक को पढ़ाने के बजाय इतनी महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी क्यों दी गई?


जबकि विश्वविद्यालय में डिप्टी रजिस्ट्रार और असिस्टेंट रजिस्ट्रार जैसे प्रशासनिक अधिकारी मौजूद हैं, फिर भी उन्हें जिम्मेदारी न देकर एक परिवीक्षाधीन सह-प्राध्यापक को कुलसचिव का प्रभार देने का औचित्य क्या है? विश्वविद्यालय प्रशासन को इस निर्णय का नियम और आधार सार्वजनिक करना चाहिए।


> *Application ID ने बढ़ाए भर्ती प्रक्रिया पर सवाल*


खंबारी ने कहा कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में चल रही भर्ती प्रक्रिया में एक ऐसा Application ID सामने आया है, जिसे उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रभारी कुलसचिव की पत्नी से संबंधित बताया जा रहा है।


महत्वपूर्ण बात यह है कि Application ID में अभ्यर्थी का नाम दर्ज नहीं है और दावा-आपत्ति सूची में भी संबंधित नाम सामने नहीं आया है। ऐसे में NSUI का सवाल किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर है।


उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि उक्त Application ID किस अभ्यर्थी की है और क्या प्रभारी कुलसचिव के परिवार से जुड़े किसी अभ्यर्थी का आवेदन इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल है। यदि ऐसा है, तो हितों के टकराव से बचने के लिए प्रभारी कुलसचिव को भर्ती प्रक्रिया से अलग रखने की क्या व्यवस्था की गई है, इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।


> *भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग*


NSUI जिलाध्यक्ष ने मांग की कि भर्ती प्रक्रिया से संबंधित Application ID, पात्रता, दावा-आपत्ति, मेरिट, प्राप्तांक, चयन के मापदंड एवं चयन समिति से संबंधित जानकारी नियमानुसार सार्वजनिक की जाए, ताकि अभ्यर्थियों के बीच किसी प्रकार का भ्रम या संदेह न रहे।


उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले और चयन पूरी तरह निर्धारित नियमों एवं पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाए।


> *तीन साल से जमे कर्मचारियों पर भी सवाल*


विशाल खंबारी ने विश्वविद्यालय में लंबे समय से एक ही पद अथवा स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि शासन द्वारा तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, तो विश्वविद्यालय प्रशासन को उनका पालन सुनिश्चित करना चाहिए और इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।


> *“कुलपति इन सवालों का जवाब दें”*


विशाल खंबारी ने कहा कि “हम किसी व्यक्ति विशेष पर बिना प्रमाण आरोप नहीं लगा रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसलों और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों ने गंभीर सवाल जरूर खड़े किए हैं। योग्य प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद परिवीक्षाधीन सह-प्राध्यापक को प्रभारी कुलसचिव क्यों बनाया गया और भर्ती प्रक्रिया में हितों के टकराव से बचने के लिए क्या व्यवस्था की गई है, इसका जवाब कुलपति को देना चाहिए।”


उन्होंने कहा कि “विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के भविष्य का संस्थान है। NSUI भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता, नियमों का पालन और जवाबदेही की मांग करती है। कुलपति इन सवालों पर स्पष्ट जवाब दें। यदि इन मुद्दों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो NSUI लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगी।”

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