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आशीष तिवारी

“मताधिकार पर हमला”: SIR प्रक्रिया में जाति-समुदाय विशेष को निशाना बनाने का आरोप, आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग से की उच्चस्तरीय जांच की मांग....

रायपुर।छत्तीसगढ़ में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर आम आदमी पार्टी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि एक राजनीतिक दल द्वारा चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने के उद्देश्य से जाति और समुदाय विशेष को चिन्हांकित कर फर्जी आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं, जिसमें निर्वाचन से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत हो रही है।

पार्टी का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया से संविधान प्रदत्त मताधिकार पर सीधा प्रहार हो रहा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

पार्टी ने गिनाईं छह बड़ी अनियमितताएं:

आम आदमी पार्टी द्वारा मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपे गए आवेदन में निम्न गंभीर त्रुटियों और अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है—

1.30% मतदाताओं को अचानक नोटिस

जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा 23 दिसंबर 2025 को प्रथम प्रकाशन के बाद सभी राजनीतिक दलों को मतदाता सूची उपलब्ध कराई गई थी और 20 जनवरी तक आपत्ति दर्ज करने की समय-सीमा तय की गई थी। इस दौरान किसी भी दल द्वारा आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई। इसके बावजूद *“Logical Discrepancies”* के नाम पर लगभग 30 प्रतिशत मतदाताओं को दोबारा नोटिस जारी कर दिया गया, जिसकी सूचना राजनीतिक दलों को लिखित रूप से नहीं दी गई।

2.जाति-समुदाय विशेष को निशाना बनाने का आरोप

20 जनवरी के बाद अचानक 22 जनवरी तक राज्य के लगभग हर विधानसभा क्षेत्र में ST, SC और मुस्लिम समुदाय से जुड़े मतदाताओं के नामों पर आपत्तियां दर्ज की गईं। खल्लारी और महासमुंद विधानसभा की आपत्ति सूची को पार्टी ने प्रमाण स्वरूप संलग्न किया है।

3.एक व्यक्ति द्वारा सामूहिक आपत्तियां

पार्टी का आरोप है कि एक ही व्यक्ति द्वारा एक दिन में 5 से 30 तक आपत्तियां दर्ज कराई गईं, जबकि उसका संबंधित मतदान केंद्र से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

4.ERO की भूमिका पर सवाल

खल्लारी विधानसभा क्षेत्र में ERO (बागबाहरा SDM) द्वारा आपत्तियों को सीधे अपने स्तर पर स्वीकार किया गया, जबकि नियमों के अनुसार ये आवेदन BLO के माध्यम से आने चाहिए थे।

5.सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी

पार्टी का कहना है कि फार्म-7 के तहत जिन मतदाताओं के नाम पर आपत्ति दर्ज की गई, उनकी पहचान और EPIC नंबर सार्वजनिक नहीं किए गए, जबकि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि पारदर्शिता बनाए रखी जाए।

6.फर्जी आवेदनों का आरोप

जांच में कई ऐसे मतदाता मौके पर स्थानीय निवासी पाए गए, जिनके नाम काटने के लिए कथित रूप से फर्जी आवेदन पेश किए गए। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत यह अपराध दंडनीय है, जिसमें कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।

नेताओं के बयान:

प्रदेश महासचिव वदूद आलम ने कहा,

“प्रदेश के लगभग हर जिले से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां मतदाताओं के नाम बेवजह सूची से हटाए जा रहे हैं। फर्जी आपत्तियों पर कार्रवाई होना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।”

प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गा झा ने कहा,

“यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है, जिसका उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों को मतदान के अधिकार से वंचित करना है।”

प्रदेश सह संगठन मंत्री समीर खान ने कहा,

“यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच नहीं हुई, तो आम आदमी पार्टी इसे जनता के बीच लेकर जाएगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क से लेकर न्यायालय तक संघर्ष करेगी।”

प्रतिनिधिमंडल ने सौंपा ज्ञापन:

मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल मुख्य निर्वाचन अधिकारी यशवंत कुमार से मिला और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई और फर्जी आपत्तिकर्ताओं पर FIR दर्ज करने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महासचिव वदूद आलम,प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गा झा,प्रदेश सह संगठन मंत्री समीर खान,प्रदेश मीडिया प्रभारी मिहिर कुर्मी,रायपुर लोकसभा अध्यक्ष अजीम खान और रायपुर जिला महासचिव नरेंद्र ठाकुर शामिल रहे।

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