ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उठे सवालों का जवाब जरूरी, 13 करोड़ से अधिक नामों के मामले में सुप्रीम कोर्ट करे जांच: इन्तेखाब आलम
दिल्ली।अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य एवं एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, इन्तेखाब आलम ने कहा है कि देश में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जिस तरह के गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, उन पर अब केवल राजनीतिक बहस पर्याप्त नहीं है। निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायिक जांच की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि The Indian Express की हालिया जांच रिपोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर बेहद गंभीर सवाल सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए, जबकि चुनाव आयोग के ही दो आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले दस महीनों में कम-से-कम 14 बार आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं।
इन्तेखाब आलम ने कहा कि जब बिहार से शुरू हुई SIR की प्रक्रिया बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली और महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में करोड़ों मतदाताओं को प्रभावित कर रही हो और उसी समय आयोग के भीतर से ही निर्णय लेने की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां सामने आएं, तो देश को इसका जवाब मिलना चाहिए।
इन्तेखाब आलम ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को यह स्पष्ट करना होगा कि यदि आयोग के सभी निर्णय पूरी तरह पारदर्शी और नियमसम्मत थे, तो उनके ही दो सहयोगी चुनाव आयुक्तों ने बार-बार लिखित आपत्तियां क्यों दर्ज कीं? रिपोर्ट में कुछ कदमों को “unauthorised” और “illegal” बताए जाने का भी उल्लेख है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी आंदोलन किसी राजनीतिक दल के हित के लिए नहीं, बल्कि हर भारतीय के मताधिकार और चुनाव आयोग की संवैधानिक विश्वसनीयता की रक्षा के लिए है। मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम रहना या हटना सीधे उसके लोकतांत्रिक अधिकार से जुड़ा विषय है।
इन्तेखाब आलम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस पूरे घटनाक्रम का गंभीरता से संज्ञान लेकर स्वतंत्र जांच की निगरानी करनी चाहिए। जांच के दौरान यदि किसी जिम्मेदार अधिकारी के देश से बाहर जाने की वास्तविक आशंका हो तो कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि जांच प्रभावित न हो और कोई व्यक्ति जवाबदेही से बच न सके।
इन्तेखाब आलम ने कहा कि यह समय केवल बयानबाजी का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का है। चुनाव आयोग देश की चुनावी व्यवस्था का प्रहरी है; इसलिए उसकी निष्पक्षता पर उठे सवालों का जवाब भी उतनी ही पारदर्शिता से मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन मतदाता का अधिकार और संविधान स्थायी हैं। बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली और महाराष्ट्र तक मतदाता सूची को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। कांग्रेस का आंदोलन इसी संवैधानिक अधिकार की रक्षा के लिए जारी रहेगा।
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