पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हुए शर्मसार, कुर्मी समाज के मंच पर राजनीति करने का आरोप, BJP ने दी करारी सीख,अपने ही समाज में राजनीति पूर्व मुख्यमंत्री बघेल को पड़ी महंगी.....
कुर्मी समाज के कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री बघेल पर मंच में कांग्रेसीकरण करने का आरोप:
बालोद।कुर्मी समाज के वार्षिक सम्मेलन का मंच उस वक्त सियासी रणभूमि में बदल गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों और धान के मुद्दे पर भाजपा सरकार पर हमला बोल दिया। लेकिन इस हमले के बाद भाजपा नेताओं ने भी पलटवार करते हुए बघेल को घेर लिया और आरोप लगाया कि वे हर मंच को कांग्रेस की राजनीति का औजार बनाने में लगे हैं।
भाजपा जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख ने दो टूक कहा कि यह समाज का कार्यक्रम था, कोई कांग्रेस की रैली नहीं।उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंच सामाजिक संवाद के लिए दिया गया था, तो उसे राजनीतिक भाषण में क्यों बदला गया? भाजपा नेताओं का आरोप है कि भूपेश बघेल मुद्दों पर चर्चा के नाम पर सिर्फ सियासी माहौल गरमाने और सुर्खियां बटोरने पहुंचे थे।
“कांग्रेस की पहचान सिर्फ विवाद और आरोपों की राजनीति” — BJP
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस और भूपेश बघेल की राजनीति हमेशा टकराव और आरोपों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस शासनकाल में भी धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था पर सवाल उठते रहे, लेकिन उस वक्त जवाबदेही तय करने से सरकार बचती रही।
ठाकुर ने कहा, “आज जब भाजपा सरकार पारदर्शिता और जांच की बात करती है, तो कांग्रेस को मिर्ची लग रही है।जनता को गुमराह करने के लिए मंच दर मंच सिर्फ आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन अपने कार्यकाल की जवाबदेही से भूपेश बघेल कभी पीछे मुड़कर नहीं देखते।”
सामाजिक मंच पर राजनीति का आरोप:
भाजपा नेताओं का कहना है कि समाज के कार्यक्रम में आए लोग सामाजिक एकता और मुद्दों पर चर्चा सुनने पहुंचे थे,न कि कांग्रेस बनाम भाजपा का भाषण।उनका आरोप है कि बघेल ने जानबूझकर मंच को राजनीतिक रंग देकर माहौल को तनावपूर्ण बनाया।
धान और किसानों पर बयानबाज़ी पर सवाल:
भाजपा ने यह भी कहा कि धान खरीदी व्यवस्था पर कांग्रेस के आरोप खोखले हैं।पार्टी का दावा है कि भाजपा सरकार में किसी भी शिकायत पर जांच और कार्रवाई की स्पष्ट व्यवस्था है,जबकि कांग्रेस के समय में ऐसी पारदर्शिता नहीं थी।
“राजनीति करनी है तो पार्टी का मंच चुनें” — BJP का संदेश:
भाजपा जिलाध्यक्ष ने साफ कहा कि अगर कांग्रेस को राजनीति करनी है तो सामाजिक मंचों को विवाद का अखाड़ा बनाने के बजाय अपनी पार्टी की सभाएं आयोजित करे।समाज के कार्यक्रमों को सम्मान और मर्यादा के साथ चलने देना चाहिए।
बालोद का यह घटनाक्रम एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति में गर्माहट ले आया है, जहां मंच कोई भी हो,सियासी टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा।
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