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आशीष तिवारी

दलगत राजनीति की भेंट चढ़ी जनता की कमाई: आप नेता मिथलेश साहू ने कहा- यह 'सही-गलत' का खेल नहीं, जनता के धन की खुली बर्बादी है!

रायपुर। रायपुर शहर में दो प्रमुख परियोजनाओं, स्काईवॉक (Skywalk) और एनआईटी चौपाटी (NIT Chaupati), को लेकर जारी राजनीतिक द्वेष पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मिथलेश साहू ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह तथाकथित 'विकास' और 'रोजी-रोटी' का विवाद नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर जनता की मेहनत की कमाई की खुली बर्बादी है।

मिथलेश साहू ने अपने बयान में कहा, "आज सत्ता पक्ष भाजपा और विपक्ष कांग्रेस, दोनों ही दल अपनी सुविधा और राजनीतिक नफा-नुकसान देखकर इन परियोजनाओं को परिभाषित कर रहे हैं। एक दल के लिए स्काईवॉक 'विकास' है, तो दूसरे के लिए यह 'बर्बादी'। इसी तरह, एनआईटी चौपाटी एक के लिए 'रोजी-रोटी' का माध्यम है, तो दूसरे के लिए 'अतिक्रमण'।"

उन्होंने आगे कहा, "परंतु इस राजनीतिक होड़ में, एक कड़वा और अकाट्य सत्य छिपा है, जिसे दोनों दल नज़रअंदाज़ कर रहे हैं—वह है जनता का बर्बाद हुआ पैसा। चाहे स्काईवॉक योजना में विलंब की बात हो या चौपाटी को विस्थापित करने की, हर कदम पर करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है, जिसका सीधा बोझ राज्य की गरीब जनता पर पड़ा है।"

चौपाटी विस्थापन: सियासी भूल का खामियाजा भुगत रहे गरीब!

नेता साहू ने चौपाटी विस्थापन के मुद्दे को और भी गंभीर बताते हुए कहा, "चौपाटी को एक जगह से हटाकर जिस नई जगह विस्थापित किया गया है, अब उस पर रेलवे द्वारा अपनी ज़मीन होने का दावा किया जा रहा है। प्रशासन की अदूरदर्शिता और सियासी जल्दबाजी के कारण आज ठेले-गुमटी वाले व्यापारियों की आजीविका फिर से संकट में आ गई है। पहले उन्हें अतिक्रमण के नाम पर हटाया गया, और अब नई जगह भी उन्हें स्थिरता नहीं दे पाई है। यह सीधा-सीधा उन गरीबों की रोजी-रोटी पर हमला है, जो राजनीतिक दाँव-पेंच की बलि चढ़ गए हैं।"

प्रमुख बिंदु:

जनता के पैसे की बर्बादी: नेता साहू ने सवाल किया कि जनता के पैसे का उपयोग अगर इस तरह बार-बार परियोजनाओं को बनाने और बिगाड़ने में किया जाएगा, तो राज्य का वास्तविक विकास कैसे होगा? उन्होंने दोनों दलों पर राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम करने का आरोप लगाया।

विकास नहीं, प्रतिशोध: उन्होंने मांग की कि स्काईवॉक और चौपाटी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक नफा-नुकसान देखने के बजाय, प्रशासन को विशेषज्ञों की राय लेकर एक स्थायी और जनहितैषी समाधान निकालना चाहिए।

जिम्मेदारी तय हो: नेता साहू ने इस बर्बादी के लिए जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी परियोजनाओं पर रोक लगाने की मांग की, जहां दलगत राजनीति के कारण जनता के धन की हानि हो और गरीब लोगों की आजीविका पर संकट आए।

मिथलेश साहू ने अंत में कहा, "यह 'सही-गलत' का खेल नहीं है। यह जनता के धन की खुली बर्बादी है और मैं इसका पुरजोर विरोध करता हूँ। मेरी मांग है कि दोनों दलों को अपनी राजनीतिक तलवारें म्यान में रखनी चाहिए और राज्य की जनता के हित तथा गरीबों की आजीविका को सर्वोपरि रखना चाहिए।"

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