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आशीष तिवारी

50 साल बाद भी न्याय नहीं! गंगरेल बांध से उजड़े 9,000 परिवारों का पुनर्वास अटका, कोर्ट के फैसले की खुलेआम अवहेलना, आम आदमी पार्टी का मिला समर्थन.....

रायपुर/धमतरी।गंगरेल बांध के निर्माण (1975) से प्रभावित 52 गांवों के 8,026 खातेदारों और लगभग 9,000 परिवारों का दर्द आज भी खत्म नहीं हुआ है। जिन लोगों की ज़मीनें डूबे हुए क्षेत्र में चली गईं, उन्हें कभी 500 रुपये तो कभी 800 रुपये का नाममात्र मुआवजा देकर छोड़ दिया गया।आज ये परिवार 50 वर्षों से पुनर्वास के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

प्रभावितों ने न्याय के लिए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 2020 में कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि प्रभावित परिवारों को पुनर्वास दिया जाए। इसके बावजूद आज तक सरकार ने उस फैसले को ज़मीन पर लागू नहीं किया। जोगी डभरी क्षेत्र में लगभग 1550 एकड़ शासकीय भूमि खाली होने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी सवाल खड़े करती है।

आम आदमी पार्टी रायपुर लोकसभा अध्यक्ष अजीम खान ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात के बाद कहा:

“यह बेहद शर्मनाक है कि 2020 में कोर्ट का फैसला आ चुका है, फिर भी 9,000 परिवारों को न्याय नहीं मिला। जिन लोगों की तीन पीढ़ियां इस अन्याय में गुजर गईं, उनके साथ आज भी सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। अगर सरकार की नीयत हो तो 1550 एकड़ जमीन में सभी परिवारों का पुनर्वास संभव है।”

उन्होंने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि:

“सरकार माओवादियों को मुख्यधारा में लाने की बात करती है, लेकिन पहले यह सोचे कि लोग माओवादी क्यों बनते हैं?जब 50 साल तक इंसान को न्याय नहीं मिलता, तो हताशा में लोग गलत रास्ते चुनते हैं। क्या सरकार चाहती है कि पहले लोग टूटें और फिर बाद में सरकार अपनी पीठ थपथपाए कि हमने उन्हें मुख्यधारा में लाया?”

अजीम खान ने बताया कि इस गंभीर मुद्दे को राज्यसभा में उठाने के लिए आम आदमी पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संदीप पाठक को पूरे तथ्य सौंपे जाएंगे, ताकि केंद्र सरकार पर दबाव बनाया जा सके।

उन्होंने दोनों प्रमुख दलों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि 2020 में जब कोर्ट का फैसला आया तब कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल थे।आज भाजपा की सरकार को भी दो साल हो चुके हैं, लेकिन पुनर्वास पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यह साबित करता है कि पीड़ितों के मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष दोनों की चुप्पी आपसी मिलीभगत जैसी है।

युवा विंग प्रदेश अध्यक्ष इमरान खान ने बताया की :

यह समस्या आज की नहीं बल्कि 51 सालों से है, इनका जो मामला है वो 1975 का है , इनकी कई पीढ़ियाँ तक खत्म हो चुकी है लेकिन आज भी उनके बच्चे पुनर्वास के लिए लड़ रहे है। प्रदेश अध्यक्ष इमरान का कहना है कि इसमें 52 गाँव जिसमें 8026 खातेदार है और 76 प्रतिशत आदिवासी परिवारों की संख्या है जिनकी जमीन गंगरेल डैम के विकास के नाम पर ली गई थी , कांग्रेस, बीजेपी की सरकारें आई लेकिन इनका विकास तो नहीं बल्कि विनाश कर दिया गया, आज लड़ाई लड़ते लड़ते 51 साल बीत गए। हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी इनकी माँगे आज तक सरकार ने पूरी नहीं की जो कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। इमरान ने कहा कि आम आदमी पार्टी इनकी हर हक की लड़ाई में इनके साथ खड़ी है।

धमतरी में पुनर्वास की मांग को लेकर आम आदमी पार्टी द्वारा किए गए समर्थन कार्यक्रम में यूथ विंग अध्यक्ष इमरान खान, रायपुर लोकसभा अध्यक्ष अजीम खान,महासमुंद लोकसभा अध्यक्ष महेश यादव, धमतरी जोन सहप्रभारी रुद्र सेन, प्रदेश सहसचिव श्रवण यादव, पूर्व रायपुर ग्रामीण अध्यक्ष मोहन चक्रधारी, प्रदेश सहसचिव कलावती मार्को के अलावा धमतरी जिला अध्यक्ष, ललित नगारची, संजय सिन्हा समेत धमतरी के समस्त पदाधिकारी मौजूद रहे।पार्टी ने ऐलान किया कि पीड़ित परिवारों के हक़ की लड़ाई को सड़क से लेकर संसद तक लड़ा जाएगा।

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