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आशीष तिवारी

छत्तीसगढ़ में आमरण अनशन बना दो जिंदगियों का शोकगीत: सरकार पर लापरवाही और दमन के गंभीर आरोप, AAP ने उठाई इस्तीफों और CBI जांच की मांग: देखें वीडियो कर्मचारी संघ प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार झा ने क्या कहा.....

रायपुर।छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहली बार किसी ट्रेड यूनियन आंदोलन में दो आंदोलनकारियों के दुखद निधन की घटना ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। 23 जनवरी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती के दिन से लागू हुई पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था और नवा रायपुर के तूता धरनास्थल पर चल रहे आमरण अनशन के बीच हुई इन मौतों को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

आम आदमी पार्टी (AAP) के कर्मचारी विंग के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार झा ने इस पूरे घटनाक्रम को “राज्य की संवेदनशीलता पर करारा तमाचा” बताते हुए शिक्षा मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से तत्काल त्यागपत्र की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि धरनास्थल पर न तो समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, न ही आंदोलनकारियों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था की गई। सरकार की ओर से मांगों पर संवाद की पहल भी नहीं हुई, जिसके परिणामस्वरूप स्थिति गंभीर होती चली गई और अंततः दो आंदोलनकारियों की जान चली गई।

झा ने कहा कि यह सिर्फ एक आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि प्रशासनिक असफलता और मानवीय लापरवाही का प्रतीक है। उनके अनुसार, जिस दिन से पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू हुई, उसी दिन से हालात और बिगड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों के साथ कथित रूप से दमनात्मक कार्रवाई और मानसिक प्रताड़ना हुई, जिसने परिस्थितियों को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया।

AAP का दावा है कि यह घटना प्रधानमंत्री की “गारंटी” और राज्य सरकार के सुशासन के दावों के ठीक विपरीत है। पार्टी नेताओं का कहना है कि पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है। इसी क्रम में उन्होंने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की मांग की है, ताकि पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी और स्वतंत्र समीक्षा हो सके।

आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल साहू और कार्यकारी अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने भी इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी का कहना है कि दिवंगत आंदोलनकारियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा और अनुकंपा नियुक्ति दी जाए, ताकि परिवारों को आर्थिक और सामाजिक संबल मिल सके।

पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर सरकार की ओर से ठोस निर्णय और सार्वजनिक आश्वासन नहीं आता है, तो 29 जनवरी को पूरे प्रदेश में व्यापक प्रदर्शन और उग्र आंदोलन किया जाएगा। नेताओं का दावा है कि यह आंदोलन सिर्फ मुआवजे की मांग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जवाबदेही तय करने और व्यवस्था में सुधार के लिए निर्णायक लड़ाई बनेगा।

इस पूरे मामले ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। एक ओर सरकार पर संवेदनहीनता और प्रशासनिक विफलता के आरोप लग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से स्थिति की समीक्षा और तथ्यों की जांच की बात कही जा रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इन आरोपों का क्या जवाब देती है और क्या किसी स्वतंत्र जांच की घोषणा होती है।

फिलहाल, दो जिंदगियों के असमय चले जाने का दर्द और सवालों का सैलाब छत्तीसगढ़ की माटी में गूंज रहा है—क्या यह सिर्फ एक हादसा था, या व्यवस्था की चूक का नतीजा? जनता अब जवाब की उम्मीद कर रही है।

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